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संत रविदास जी का व्यक्तित्व, समाज सुधारक क्रांतिकारी,चिंतक,उत्कृष्ट युग पुरुष के रूप में हुआ है: नरेंद्र सिंह.

समारोह में विधायक हुए शामिल, उनके दिये उपदेश शिक्षा को स्मरण किया।

Bhind. भारतीय जनता पार्टी प्रदेश नेतृत्व के निर्धारित कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय संत श्रविदास की जयंती के अवसर पर क्षेत्रीय विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह जमना रोड पर आयोजित रविदास जयंती चौथा समारोह में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने दिये हुए उपदेश,शिक्षा को स्मरण किया। साथ ही लोगों की समस्याओं को सुना एवं निराकारण के लिए निर्देश दिए। उनके छाया चित्रों पर पुष्पांजलि कर अर्पित करते हुए उनके विचारों को साझा कर,समाज को रविदास के अनुकरणीय विचार पर चलने के लिए जागृत किया।

विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह कहा राष्ट्रीय संत रविदास जयंती के अवसर पर वीरांगना अमन तिवारी छात्रावास मांगलिक भवन पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते हुए कहा कि मध्ययुगीन भक्ति चेतना के प्रमुख संतों में संत रविदास जी का नाम श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल मात्र संत अथवा भक्तों के रूप में ही प्रतिष्ठित नहीं है, अपितु उनका व्यक्तित्व समाजसुधारक,क्रांतिकारी,चिंतक, उत्कृष्ट युग-पुरुष के रूप में अभिव्यक्त हुआ है।ऐसे महामानव के जीवन चरित्र ने वर्तमान समाज को एक नई ज्योति प्रदान की है। उनकी पूर्ण प्रामाणिक एवं सर्वप्रथम प्रकाशित वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में उपलब्ध होती है। विधायक कुशवाह ने कहा कि संत रविदास जी का नाम विभिन्न ग्रंथों में अलग-अलग रूप में उपलब्ध होता है। उनके प्रचलित नामों में रविदास, रैदास रोहतास, रोहीदास, रामदास, रुईदास आदि उल्लेखनीय हैं। रामानंद संप्रदाय में मान्य ग्रंथ भक्तमाल में उन्हें रविदास के नाम से अभिहित किया गया है। वर्तमान समय में अन्य नामों को महत्व न देकर उनके जो दो नाम प्रायः ग्रंथों में उपलब्ध होते हैं, वे हैं रविदास और रैदास।संत रविदास जी के माता पिता के संबंध में भी कई मत उपस्थित होते हैं आचार्य पृथ्वी सिंह आजाद ने भविष्य पुराण के आधार पर उनके पिता का नाम मानदास स्वीकार किया है लेकिन संप्रदाय में यह नाम प्रचलित नहीं है। रविदास जी के पिता का नाम रग्घू या रघुनाथ अधिक प्रसिद्ध है। इनकी माता करमा देवी मानी जाती हैं। कई प्रकाशित ग्रंथों में संत रविदास जी की माता का नाम घुरवनिया भी मिलता है। लेकिन करमा नाम को उनके अनुयायियों ने अधिक अपनाया है। अतः उनकी माता का नाम करमा देवी मानना अधिक समीचीन है। रग्घू जी का जूते बनाने का व्यवसाय था। विधायक कुशवाह ने कहा हम सब कार्यकर्ता उनके अनुकरणीय विचारों को समाज के अंतिम छोर तक के व्यक्ति तक पहुंच कर उनके व्यक्तित्व को समाज तक पहुंचाने का अभन किया