Advertisement

आयुर्वेद हमारी धरोहर, स्वस्थ जीवन का आधार : डॉ. रमेश दुबे.

Hasrat ali
भिंड। अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के 120वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने आयुर्वेद को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसे जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. रमेश दुबे ने कहा कि आयुर्वेद हमारी जीवन पद्धति है, जिसे हमारे पूर्वज हमें सौंपकर गए हैं। आधुनिक भौतिक जीवनशैली के कारण दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है, ऐसे में स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेद ही सही मार्ग दिखा सकता है।

उन्होंने कहा कि नियमित दिनचर्या में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि का अभ्यास करना चाहिए, यही वास्तविक योग है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. शिवकुमार राजोरिया ने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियां लंबा और स्वस्थ जीवन प्रदान करती हैं। उन्होंने दालचीनी, मेथी, अदरक, सौंफ, जीरा, हल्दी, तुलसी, पुदीना, धनिया, लहसुन एवं अर्जुन की छाल जैसी घरेलू औषधियों के नियमित सेवन पर जोर देते हुए कहा कि इससे डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की संभावना काफी कम हो सकती है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरेश वंशल, डॉ. बी.एन. भारद्वाज, डॉ. वासुदेव नरवरिया, डॉ. विश्वनाथ शर्मा एवं डॉ. मधुरेश त्रिपाठी का शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. रमेश दुबे का सम्मान डॉ. आर.डी. परिहार द्वारा किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. उमाशंकर मिश्रा ने कहा कि आमजन को सही मार्ग दिखाना चिकित्सकों का नैतिक दायित्व है और आयुर्वेद को अभियान के रूप में प्रचारित किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान धन्वंतरि के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर डॉ. प्रभुदयाल शाक्य, डॉ. बालकराम श्रीवास, डॉ. सुरेश वर्मा, डॉ. सुरेश शाक्य, डॉ. नामदेव, समाजसेवी शिव प्रताप सिंह, शैलव सिंह सहित अनेक चिकित्सक उपस्थित रहे। कार्यक्रम डॉ. मधुरेश त्रिपाठी के निवास पर संपन्न हुआ। संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. आर.डी. परिहार ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *