Bhind । देहात थाना अंतर्गत सेंट माइकल स्कूल में एक विवाद उत्पन्न हो गया। जब स्कूल प्रबंधन ने एक छात्रा को तिलक और कलाबा पहनकर स्कूल आने पर उसे बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद छात्रा के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया। आरोपों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और मामले की जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह घटना धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देती है और बच्चों के धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। प्रदर्शन के दौरान, देहात पुलिस और एसडीएम तक पहुंचे।
जानकारी के अनुसार स्कूल के प्रिंसिपल स्टेकनलेस वदंनादाम ने कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और छात्रा के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रा के परिजनों का आरोप गलत है और यह पूरी तरह से निराधार है। प्रिंसिपल ने यह भी बताया कि छात्रा के परिजनों द्वारा स्कूल की फीस नियमित रूप से जमा नहीं की गई थी। उन्हें कई बार फीस जमा करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में फीस जमा करने के लिए एक और नोटिस भेजा गया था, जिसके बाद स्कूल को धमकी दी गई थी।

प्रिंसिपल का कहना था कि यह सभी घटनाएं व्यक्तिगत और आस्थागत मुद्दों का हिस्सा हैं, और स्कूल का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना है, न कि किसी धर्म या आस्था के प्रति असम्मान करना है।

परिजनों का आरोप:
छात्रा के परिजनों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने जानबूझकर उनकी धार्मिक आस्थाओं का अपमान किया। उनकी बेटी को तिलक और कलाबे पहनकर आने पर स्कूल से निकाल दिया। उनका कहना था कि बच्चों को अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखने का अधिकार है, और स्कूल को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए। इस आरोप के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने स्कूल प्रांगण प्रदर्शन किया और मामले की जांच की मांग की। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद देहात थाना प्रभारी पुलिस और एसडीएम अखिलेश शर्मा मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत की और मामले को शांति से सुलझाने का प्रयास किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी कहा कि वे इस मुद्दे की जांच कराए जाने तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखेंगे।
अच्छी प्रबंधन ने थाने में दिया आवेदन:
स्कूल प्रबंधन ने इस मामले में पुलिस स्टेशन में आवेदन भी दिया है। जिसमें आरोप लगाया गया कि छात्रा के परिजनों ने धमकी दी थी और फीस भुगतान के संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया था। मामले की जांच जारी है,और स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य केवल शिक्षा है,वे किसी भी प्रकार की धार्मिक आस्था का अपमान नहीं करना चाहते है।














