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मानदेय विसंगति पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सोपे ज्ञापन।

मानदेय विसंगति पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सोपे ज्ञापन।

पांच सूत्री मांगों को लेकर आंगनवाड़ी वर्करों ने कलेक्टर प्रांगण में सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाज

भिड़ । महिला एवं बाल विकास विभाग के जेरे नज़र काम करने वाली आंगनवाडी कर्मियों ने मानदेय विसंगतियों को लेकर बुधवार मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौप है। ज्ञापन में कहा गया है इस विसंगति को तुरन्त समाप्त किए जाए नहीं तो सड़को पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे।

आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन मध्य प्रदेश (सीटू) के आह्वान पर बुधवार कलेक्ट्रेट प्रांगण में लगभग दो सैकड़ा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए सौंपे ज्ञापन में कहा है कि निरंतर बड़ती महंगाई से परेशान प्रदेश में विभिन्न श्रेणी के संविदा कर्मियों व अन्य श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि सरकार ने की है। उसके अनुपात में प्रदेश सरकार ने आंगनवाडी कर्मियों के मानदेय में की गयी वृद्धि बेहद नाम मात्र की है। इस मानदेय वृद्धि में सहायिकाओं एवं मिनी आंगनवाडी केन्द्र कार्यकर्ता ओं के मानदेय में बेहद सीमित वृद्धि के माध्यम से सरकार ने दुयेम दर्जे का भेदभाव किया है।

जिसमें एक ओर सहायिका एवं मिनी कार्यकर्ता को पहले ही अपेक्षाकृत कम मानदेय दिया जाता रहा है। उस पर दूसरी ओर 2018 की बढ़ी राशि से काटी गई राशि वापसी के अलावा मानदेय में कोई वृद्धि ही नहीं की गयी। अधिकारी को ज्ञापन में कहा गया है यूनियनों की ओर से राजधानी में विशाल प्रदर्शन कर विरोध जताये जाने के बाद मुख्यमंत्ट्री ने इस विसंगति को स्वीकार कर इसे दुरुस्त करने की घोषणा कई बार की है। लेकिन आदेश आज तक जारी नही किया गया है।

और कार्यकर्ताओं के मानदेय में बेहद कम वृद्धि हैl जब कि 30 से 35 बरस की सेवा के बाद भी सहायिका के लिये तय की गयी मानदेय एवं सहायिकाओं एवं कार्यकर्ता- दोनों की जिम्मेदारियों को निभाने वाली मिनी आंगनवाडी केन्द्र की कार्यकर्ता का मानदेय किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नही है।

उन्होंने लिखित बताया है कि 11 जून की गई घोषणा आंगनवाडी कर्मियों को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा योजना का लाभ दिये जाने की घोषणा की गयी थी लेकिन 28 जून 2023 आदेश में इसका ज़िक्र नही है।

गौरतलब है कि आंगनवाड़ी कर्मी सरकार की विभिन्न योजनाओं के अमल हेतु शासन के मुख्य अंग के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाया करती है। जब कि स्वयं मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि आंगनवाडी कार्यकर्ता व सहायिका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देकर उन्हें वेतन व सुविधायें दी जावेगी, लेकिन मुख्यमंत्री बहिनों के भया ने ऐसा तो किया नही बल्कि मानदेय में केवल नाममात्र की वृद्धि कर दी, जिससे बढी हुयी महंगाई से मानदेय की वास्तविक मूल्य में हुयी गिरावट की भरपायी भी नही की जा रही है।
ज्ञापन में कहा है आज परिवार चलाने के लिये न्यूनतम 26,000 रुपये की जरूर है और हमारी मांग है कि सरकार हमारा न्यूनतम मानदेय 26,000 रुपये करें। और कार्यकर्ता, सहायिका एवं मिनी आंगनवाडी कार्यकर्ताओं के साथ न्याय करें।

ये है आंगनबाड़ी वर्करों की प्रमुख मागे,,,,,!
मानदेय वृद्धि की विसंगतियों को दूर करते हुये आंगनवाडी कर्मियों के मानदेय में अन्य विभागों में की गयी वेतन में वृद्धि के अनुपात से वृद्धि की जावे। सहायिकाओं को अकुशल श्रेणी के न्यूनतम वेतन के बराबर मानदेय में पूर्ण वृद्धि की जावे एवं मिनी केन्द्र की कार्यकर्ता को पूर्ण कार्यकर्ता के बराबर मानदेय एवं सुविधायें प्रदान किया जावे। मानदेय वृद्धि की विसंगतियों को दूर करते हुये छत्तीसगढ़ की भांति आंगनवाडी कर्मियों की सेवा निवृत्ति आयु 65 वर्ष की जावे। मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल चिकित्सा एवं दुघर्टना बीमा योजना आदेश में शामिल किया जावे।