विलुप्त होती प्रजातियों को बचाने की जिम्मेदारी हम सब की है: मोहम्मद माज* *सुप्रयास ने सामान्य बन मंडल अधिकारियों, वन रक्षकों के लिए की कार्यशाला
भिण्ड। आज हम ऐसी दुनिया में पहुंच गए हैं जहां पर जानवरों, कीड़ों और वनस्पतियों के विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है, हम सब भी को इस क्षेत्र में जागरूकता लाने की बहुत जरूरत है। चंबल संभाग में इस दिशा में बहुत काम किये जा रहे है। हम घड़ियालों के साथ साथ गेंगेटिक डॉल्फिन को संरक्षित किए हुए हैं। ये उद्गार मोहम्मद माज भिंड डिस्टिक फॉरेस्ट ऑफीसर ने उस वक्त कहे जब वह सामाजिक संस्था सुप्रयास के बैनर तले आयोजित विलुप्त होती प्रजातियां पर आधारित एक प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा राष्ट्रीय लुप्त प्राय:प्रजाति दिवस अर्थात नेशनल एंडेंजर्ड स्पीशीज डेके घर घर पहुंचाने की जरूरत है। इस मौके पर उनके साथ
एसडीओ फॉरेस्ट बहादुर सिंह ने कहा कि अपने चंबल संभाग में अब भारत से विलुप्त हो चुकी प्रजाति चीता को बसाने का उल्लेखनीय काम हो रहा है। ऐसे ही हमें और भी अधिक प्रजातियों को विशेष प्रयास करके बसाने की और बचाने की आवश्यकता है। वही सुप्रयास की अध्यक्ष मोनिका जैन ने कहा कि इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर के अनुसार दुनिया भर में लगभग 40% जानवर, कीड़े और पौधों के विलुप्त होने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अपने ग्वालियर चंबल संभाग में से ही कई प्राणी अब दिखाई नहीं दे रहे हैं। जिनमें से स्याहगोश, सोन चिरैया और उद्बिलाव प्रमुख है।
सुप्रयास के सचिव डॉ मनोज जैन ने सारगर्भित उद्बोधन में कहा लुप्तप्राय प्रजातियों के सामने कई खतरे हैं जिनमें पर्यावरण का परिवर्तन, शिकारियों द्वारा अत्यधिक शिकार, अवैध शिकार, मनुष्यों के द्वारा अतिक्रमण उनके आवास से छेड़छाड़ करना और उसे नष्ट करना है। प्राकृतिक आपदाऑ के साथ-साथ मानव निर्मित आपदाएं प्रमुख हैं। कार्यशाला के समापन पर रेंज ऑफिसर एस एस सिकरवार द्वारा आए हुए सभा महानभावो का आभार व्यक्त करके किया गया।














