भिंड। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ग्राम पंचायत दुल्हगन स्थित बोरेश्वर महादेव मंदिर में पुजारी नियुक्ति विवाद को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। माननीय न्यायमूर्ति **** की एकलपीठ ने कलेक्टर के रिमांड आदेश को बरकरार रखते हुए उप संभागीय अधिकारी (एसडीएम) को निर्देश दिए हैं कि सभी पात्र अभ्यर्थियों को सुनवाई का पूरा अवसर प्रदान कर कानून एवं शासन के प्रचलित परिपत्रों के अनुसार दो सप्ताह के भीतर नया निर्णय लिया जाए।
याचिका कल्लू पुत्र ब्रज कुमार शर्मा द्वारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई थी। याचिका में 19 सितंबर 2025 के आदेश को चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया था कि मंदिर के पुजारी पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया में योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी की जा रही है और एक अयोग्य व्यक्ति की नियुक्ति पर विचार किया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एस.के. शर्मा ने न्यायालय को बताया कि कलेक्टर का आदेश केवल रिमांड आदेश है, लेकिन आशंका है कि सक्षम अधिकारी सभी पात्र अभ्यर्थियों को सुनवाई का अवसर दिए बिना निर्णय ले सकते हैं। इस पर न्यायालय से निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया।
राज्य शासन की ओर से प्रस्तुत अधिवक्ता ने भी न्यायालय द्वारा निष्पक्ष सुनवाई संबंधी निर्देश दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने माना कि मामले के गुण-दोष पर विस्तृत विचार की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि कलेक्टर पहले ही प्रकरण को नए सिरे से विचार के लिए एसडीएम को भेज चुके हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उप संभागीय अधिकारी सभी पात्र अभ्यर्थियों को सुनवाई में शामिल होने का अवसर देंगे, उनके दावों पर विधि एवं शासन के प्रचलित नियमों के अनुरूप विचार करेंगे तथा किसी भी पूर्व आदेश से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र रूप से निर्णय देंगे।
न्यायालय ने यह पूरी प्रक्रिया आदेश की तिथि से दो सप्ताह के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इसी के साथ रिट याचिका का निराकरण कर दिया गया तथा लागत के संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया गया।
















Leave a Reply