आशा-आशा पर्यवेक्षकों ने सरकार पर उपेक्षा का लगाया आरोप, सीएम के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
भिण्ड। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत आशा एवं आशा पर्यवेक्षक अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर 6 जुलाई 2026 को प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगी। आशा-आशा पर्यवेक्षक संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया है कि शासन द्वारा प्रोत्साहन राशि का समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे हजारों स्वास्थ्य कर्मियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
संयुक्त मोर्चा का कहना है कि आशा एवं पर्यवेक्षक वर्षों से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने सहित स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कई-कई महीने तक प्रोत्साहन राशि नहीं मिलती। वर्ष 2023 में घोषित एक हजार रुपये वार्षिक वेतन वृद्धि का एरियर भी अब तक जारी नहीं किया गया है। साथ ही वेतन पर्ची नहीं दिए जाने और बकाया राशि रोके जाने को भी गंभीर अनियमितता बताया गया है।
संगठन ने मांग की है कि प्रत्येक माह की 5 तारीख तक नियमित भुगतान, वार्षिक वेतन वृद्धि का एरियर, सभी लंबित भुगतान, सम्मानजनक वेतन तथा सरकारी अस्पतालों के निजीकरण पर रोक लगाई जाए। मांगें पूरी नहीं होने पर 6 जुलाई को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री एवं मिशन संचालक के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
















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