भिंड!
चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या के अवसर पर आज बुधवार को पितृ कार्य, श्राद्ध एवं तर्पण के लिए विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्य डॉ राम लखन महेरे शास्त्री द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार इस दिन देव कार्य, पुण्य स्नान एवं पूजन प्रशस्त माने गए हैं, जबकि पितृ तर्पण के लिए यह अमावस्या अत्यंत फलदायी है।
शास्त्री ने जानकारी देते हुए बताया कि 19 मार्च 2026, गुरुवार को अमावस्या प्रातः सूर्योदय से सुबह 6:53 बजे तक रहेगी,, इसके पश्चात प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी, प्रतिपदा क्षय तिथि है। उत्तरा भद्रपद नक्षत्र के संयोग में प्रातःकाल अमावस्या मान्य रहेगी, प्रातः 6:53 के बाद बाद नव संवत्सर का शुभारंभ होगा। नवरात्रि का प्रारंभ, नवरात्रि प्रतिपदा व्रत,घट स्थापना ध्वजारोहण संवत्सर फल श्रवण आदि कार्य करना धर्मशास्त्र संगत है
उन्होंने बताया कि इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का विधिवत प्रारंभ होगा। श्रद्धालु प्रतिपदा के दिन घटस्थापना, कलश स्थापना, ध्वजारोहण एवं व्रत-पूजन कर मां दुर्गा की आराधना शुरू करेंगे। नवरात्रि साधना का यह प्रथम दिवस विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।
शास्त्री ने समस्त जनमानस के लिए मंगलकामना करते हुए कहा कि श्रद्धा एवं विधि-विधान से किए गए पितृ कार्य और नवरात्रि पूजन से सुख-समृद्धि एवं कल्याण की प्राप्ति होती है।

















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