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हिंदी भाषा में पत्रकारिता समाज के लिए अनुपम उपहार है_ श्रवण पाठक

Bhind. राष्ट्रभाषा हिंदी में पत्रकारिता समाज के लिए अनुपम उपहार है इससे न सिर्फ विचारों का आदान-प्रदान प्रभावशाली तरीके से होता है बल्कि हिंदी भाषा की गरिमा भी बनी रहती है। यूं तो वर्तमान में भारत देश में विभिन्न भाषाओं का प्रचलन है और समाचार पत्र भी विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित हो रहे हैं। परंतु हिंदी भाषा में पत्रकारिता करना अपने आप में अत्यंत चुनौतियों से पूर्ण कार्य है। हिंदी भाषा के लेख जनमानस पर सटीक प्रभाव छोड़ते हैं और अंतरात्मा को भाषाई ज्ञान से तृप्त भी करते हैं। जहां एक और अंग्रेजी भाषा के लेख का दायरा वैश्विक है इसी प्रकार हिंदी के उत्कृष्ट लेख भी संपूर्ण विश्व में पढ़े जा रहे हैं । उक्त विचार भारत विकास परिषद उत्तर प्रांत के प्रांतीय गतिविधि संयोजक श्रवण कुमार पाठक ने भारत विकास परिषद शाखा जागृति द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित वैचारिक गोष्ठी में जमुना नगर में कही।

कार्यक्रम का विधिवत प्रारंभ भारत माता और मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

शाखा अध्यक्ष गगन शर्मा ने स्वागत उद्बोधन एवं विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि 30 मई 1826 में भारत का प्रथम समाचार हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड का प्रकाशन किया गया जो की बहुत ही मुश्किलों भरा था लेकिन तब से लेकर अब तक हिंदी पत्रकारिता निरंतर बुलंदियों पर है ।

इस अवसर पर शाखा जागृति के सदस्यों ने भिंड में हिंदी पत्रकारिता को अपना लंबा समय देकर जनमानस की आवाज को बुलंद करने में सहयोग करने वाले वरिष्ठ पत्रकार भानु श्रीवास्तव का शॉल, श्रीफल एवं माल्यार्पण से सम्मान किया ।
इस अवसर पर भानु श्रीवास्तव ने कहा ईमानदार पत्रकार सदैव संघर्ष की राह अपनाते हैं वह किसी के दबाव में या किसी के प्रभाव में कार्य नहीं करते, बल्कि तटस्थ एवं निष्पक्ष होकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी कलम चलाते हैं ।

हिंदी पत्रकारिता के महत्व को बताते हुए शाखा के सदस्य राधे गोपाल यादव ने कहा कि भारत विश्व की तीसरी भाषा है हमें इस बात का गर्व है।

शाखा जागृति की महिला सहभागिता प्रमुख मुदिता भारद्वाज ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं हमारी संस्कृति और सभ्यता भी है। जिस प्रकार भारतीय नारी के लिए उसके माथे की बिंदी का महत्व है, उसी प्रकार भारत में हिंदी का स्थान है।

शाखा के वरिष्ठ सदस्य पवन जैन ने अपनी कविता के माध्यम से…. भारत को इंडिया कह कर गुमनाम कर रहे हो ….कविता के माध्यम से अपने विचार रखें ।

इस अवसर पर देवकांत बरुआ, राहुल श्रीवास, ओम नारायण ओझा, प्रियंका शुक्ला, शारदा जैन, अरुना पाठक, शाखा सचिव सोनिया अग्रवाल, कोषाध्यक्ष एडवोकेट अंजू गुप्ता, रामनरेश सिंह , सोम सिंघई एवं अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार रखें।
उपस्थित सभी शाखा सदस्यों ने हिंदी पत्रकारिता को बढ़ाने के लिए हिंदी समाचार पत्रों को स्वयं एवं अन्य के घरों तक पहुंचने के लिए संकल्प लिया।