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क्या यूंही होती रहेगी मानवता शर्मसार ? ब-मुश्किल पहुचा जनाजा श्मशान तक।

Bhind । बे शक हम चांद पर पहुंच गए हैं लेकिन हमारी जमीनी व्यवस्थाएं अभी भी ध्वस्त एवं खराब है। यह कहना है उन परिजनों का जो अपनों की अर्थी को अपने कंधे पर उठाकर शमशान तक ले गए। जी मैं बात कर रहा हू। भिंड जिले के गोहद तहसील में स्थित माधौगढ़ गांव की जहां बारिश के मौसम में शव को मुक्ति धाम तक ले जाने के लिए लोगों की भीड़ जुटानी पड़ती है। ताकि कीचड़ दल दल भरे रास्ते खेतों से होकर गुजरी पगडंडी,मेड पर चल कर शव को शमशान घाट तक ले जाया जा सके।

दरअसल मामला गोहद तहसील की ग्राम पंचायत खरौआ के माधौगढ़ गांव का सामने आया है। जहां परिवार में किसी की मौत होने पर उसके शव को शमशान तक जाने के लिए भीड़ जुटानी पड़ी है। ग्राम पंचायत खरौआ के माधौगढ़ गांव में भले ही मुक्तिधाम का निर्माण करा दिया है। लेकिन वहां तक पहुँचने के लिए कोई मार्ग नहीं है नाही फिलहाल रास्ता बनने की कोई उम्मीद है। हालात ये है अगर बारिश के मौसम में किसी का अन्तिम संस्कार करने जाना पड़े तो लोगों की भीड़ पहले इकट्ठी करनी होती है। विगत दिनों गांव माधौगढ़ में रहने बाली प्रेमा बाई का निधन हो गया। उनकी शव यात्रा मुक्तिधाम तक खेतो में भरे पानी के बीच से मुक्ति धाम तक ले जानी पड़ी। बारिश का मौसम था। खेतों में भरे पानी में धंस कर ही मुक्तिधाम तक शव यात्रा ले जानी पड़ी। जबकि प्रदेश सरकार विकास के लिए कोई कोर कसर नही छोड़ रही, फिर भी विकास आज तक मुक्तिधाम से होकर नही गुजर पाया । बताना मुनासिब होगा कि भिंड जिले में यह पहली बार नही हुआ बल्कि ऐसे कई मामले सामने आने के बाद भी हालत जस के तस हैं।