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बरसात में प्रसूता को कंधो पर ले जाते है ! बीमार,बच्चे बूढ़े एवं बुजुर्ग महिलाओं का तो निकलना दूभर हो जाता हैं बारिश में।

3 किलोमीटर की रोड देखने पूरी उम्र गुज़ार दी,,,! सरकार के खोखले दावे है।

Hasrat ali

भिंड। अटेर विधानसभा क्षेत्र का सराय का पूरा एक ऐसा गांव जहां आजादी के 7 दशक समय गुजर जाने के बाद भी एक रोड नहीं बन पाई है। यहां के बुज़ुर्ग महिला पुरुष कहते हैं कि अपने गांव से भौनपुरा तक तीन किमी रोड देखने पूरी उम्र गुज़ार गई लेकिन तमाम नेता मंत्रीयों के आश्वाशन के बाद रोड नहीं बन पाई है।

आवेदन लेकर सालों से मंत्री अधिकारियों के घर,,,, ऑफिसों के चक्कर लगा रहे है। लेकिन कोई ठोस जबाब नहीं मिलता। अब तो आलम ये है की बच्ची बच्चो के संबध वाले भी यहां आने से कराने लगे है।

दाताराम हरिजन,भूरे सिंह की बात पर यकीन करे तो बो कहते है कि बरसात के दिनों में बहु बेटियों को डिलीवरी कराने चारपाई पर रख अपने कंधो पर भौंनपुरा तक ले जाना पड़ता है। यहां कोई वाहन भी नहीं आ सकता। यही हालात है बीमार लोगों को ले जाने की इतना ही नहीं अब तो इस क्षेत्र में लोग बच्चे बच्चियों के रिश्तो के लिए जो मेहमान आते हैं वह भी यहां के हालात देखकर कुछ कहे बिना ही निकल जाते हैं।

यहां तमाम मंत्री नेता अधिकारी आते हैं मात्र आश्वासन देकर चले जाते।यही हाल रहा और शासन ने सुनवाई नहीं करी तो आने वाले चुनाव के समय में अबकी बार हम गांव के लोग वोटिंग का बहिष्कार करेंगे क्योंकि नेता मंत्री चुनाव के टाइम आश्वासन देकर वोट ले जाते हैं लेकिन उसके बाद कोई नहीं आताहै। समस्या से जूझते हुए यहां लोगो का नरकीय जीवन हो गया है।

इन समस्याओं को लेकर खुलकर बोले ग्रामीण,,,,,

श्याम सिंह भदौरिया ग्राम सराय का पुरा कहते है”बरसात के समय में गर्भवती महिलाओं को कंधों पर भवनपुरा तक ले जाना पड़ता है. गुरुवार की रात ही एंबुलेंस न पहुंच पाने की वजह से कंधो पर लेकर भौनपुरा तक पहुंचे हैं। इस संबंध में सचिव सरपंच से कई बार निवेदन किया वह भी कहते हैं इस गांव से वोट नहीं मिला तो रोड काहे की”

सूरज हरिजन कहते है,,,,,कई बार रोड को लेकर शिकायती आवेदन और गुहार जिला प्रशासन को कर चुके हैं। कलेक्टर को आवेदन भी दिया लेकिन कोई जवाब नहीं आया, हमारे यहां लगभग 300 की आबादी है 200 के लगभग वोटिंग है चुनाव में नेता आकर वोट ले जाते हैं लेकिन रोड आज तक नहीं बनी। हमारा संघर्ष अभी जारी है

गजेंद्र सिंह भदोरिया का कहना है कि एक बार सरपंच ने गिट्टी डलवाई थी तब से लेकर आज तक उखड़ी पड़ी है। स्कूल जाने में बच्चों को भारी परेशानी होती है। बुजुर्ग महिला पुरुष तो यहां से जा भी नहीं सकते। बाजार में सौदा सब्जी लेने के लिए जवान लोगों का ही इंतजार करना पड़ता है।