“हम आज़ाद हैं, आज़ाद ही रहेंगे
“मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा झाबुआ में “सिलसिला” के तहत चन्द्रशेखर आज़ाद की स्मृति में स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ सम्पन्न
झाबुआ। मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी (संस्कृति परिषद) संस्कृति विभाग के जानिब से ज़िला अदब गोशा, झाबुआ एवं आलीराजपुर के संयुक्त तत्वाधान में सिलसिला एवं तलाशे जौहर के तहत महान क्रांतिकारी “चंद्रशेखर आज़ाद* की स्मृति में स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन 13 अगस्त 2023 को दोपहर 3 बजे से गार्डन पैलेस,राजवाड़ा, झाबुआ में ज़िला समन्वयक सरफ़राज़ भारतीय के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
झाबुआ में आयोजित उर्दू अकादमी के उक्त कार्यक्रम के सम्बंध में बताते हुए अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने कहा कि मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा विभिन्न आयोजनों के माध्यम से महान स्वतंत्रता सेनानियों, क्रांतिकारियों एवं दिवंगत साहित्यकारों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में झाबुआ एवं अलीराजपुर ज़िला गोशा अदब द्वारा झाबुआ में आयोजित “सिलसिला” भाभरा अलीराजपुर में जन्मे अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद को समर्पित है।
हम सब याद कर रहे हैं कि जिस खुली फ़ज़ा में हम सब सांस ले रहे है यह आज़ाद फ़ज़ा उपहार में नहीं मिली है यह शहीदों के रक्त का मूल्य है। हमें प्राण पण से इस आज़ादी की हिफ़ाज़त करनी होगी
वहीं साहित्यिक व्यक्तित्व को याद करने की कड़ी में असर इंदौरी के साहित्यिक योगदान को भी याद कर खूब सराहा जा रहा है।
झाबुआ एवं अलीराजपुर जैसे स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर संस्कृति विभाग के उस उद्देश्य को भी अकादमी दृष्टिगत रख रही है। जिसमे आदिवासी क्षेत्रों में साहित्यिक संभावनाओं की खोज शामिल है।
इसके अलावा झाबुआ ज़िला समन्वयक सरफ़राज़ भारतीय ने बताया कि सिलसिला कार्यक्रम की अध्यक्षता झाबुआ के वरिष्ठ समाज सेवी नीरज राठौर ने की एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में ज़िला कोषा अधिकारी ज़फ़र ख़ान मंचासीन रहे। प्रोग्राम के शुरुआत में झाबुआ साहित्यकार डॉ के के त्रिवेदी ने महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आज़ाद एवं डॉ वाहिद फ़राज़ ने झाबुआ के प्रसिद्ध शायर असर इंदौरी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर वक्तव्य प्रस्तुत किये। डॉ. त्रिवेदी ने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्रान्ति के धूमकेतु अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद मात्र 25 वर्ष से भी कम उम्र में अपने खून से मां भारती का अभिषेक कर क्रांतिकारियों के सिरमौर बन गये।
कालांतर में प्रजातांत्रिक समाजवादी सेना के कमांडर बनकर भारत की आज़ादी के लिए आततायी अंग्रेजी साम्राज्य की चूलें हिलाने में कामयाब रहे। 27 फरवरी 1931को अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेज़ों से संघर्ष करते हुए अंतिम गोली से आत्म बलिदान किया और अपने वचन को बनाए रखा।,,,, “अंग्रेज़ों की गोलियों का सामना करेंगें आज़ाद ही रहें हैं आज़ाद ही रहेंगे” हमें गर्व है कि भाभरा का ये वीर आज़ादी के स्वतंत्रता संग्राम का नायक ही नही महानायक बना।
इस मौके पर डॉ वाहिद फ़राज़ ने प्रसिद्ध शायर असर इंदौरी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रख्यात शायर असर इंदौरी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा इंदौर में अपनी मौसी के घर में हुई जहां उन्हें उस्ताद शायर मंज़र इंदौरी की सरपरस्ती हासिल हुई। असर इंदौरी के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी ग़ज़ल चांद पर कोई जाए तो मैं क्या करूं कहने का कीर्तिमान स्थापित किया है।
उनकी ये ग़ज़ल जो 11151 शेरों पर आधारित है। उसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल करने हेतु भेजा गया है।
असर इंदौरी उर्दू अदब/हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर हैं।
असर इंदौरी की नज़्में वादी ए कश्मीर, सदाए कश्मीर, टूटे रिश्ते, मेरा गांव मेरा देश एवं मेरा वतन इत्यादि तारीखे हिंदुस्तान में हमेशा अमर रहेंगी।
रचना पाठ के अंतर्गत जिन शोअरा ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, उनमें विशिष्ट आमंत्रित शायर के रूप में इंदौर के वरिष्ठ शायर मुश्ताक़ अंसारी ने उर्दू शायरी के बारे में चर्चा की और अपना कलाम भी प्रस्तुत किया एवं स्थानीय शायरों /साहित्यकारों में एजाज़ नाज़ी धारवी, इरफान अलीराजपुरी, सिराज तन्हा, अतीक़ हुसैन कुरैशी,आसिफ खान, अफरोज़ मकरानी, दीपक कटकानी दीप, निसार पठान रम्भापुरी, पी.डी. रायपुरिया, भैरू सिंह चौहान तरंग, अबरार कुरैशी, एम.एल. फुलपगारे, लता देवल (झाबुआ) आदि शामिल थे । कार्यक्रम का संचालन सरफ़राज़ भारतीय ने किया।
शोअरा द्वारा प्रस्तुत कुछ चुनिंदा अशआर..
मुश्ताक अंसारी इंदौर,,,,
खाक रिश्तों के तनाज़ो’ पे यूं डाली मैंने
बात न बाहर कभी घर की उछाली मैंने
मुझसे अनबन है भाई की बच्चों से नहीं
बस यही सोच के दीवार गिरा ली मैंने
डा.वाहिद फ़राज़,,,,
कहूंगा रोज़े मेहशर ये इलाही तेरी जन्नत में
अगर माॅं साथ में होगी तो जन्नत रास आएगी
सरफ़राज़ भारतीय,,,,
छा जाऊं ज़माने भर में मुहब्बत लेकर
इलाही गुरूर ना दे शऊर ही दे मुझको
सिराज तन्हा,,,,
हिंदू मुस्लिम सिक्ख ईसाई रहते हैं
इतना प्यारा ये हिंदुस्तान हमारा है
एजाज़ नाज़ी धारवी,,,,
दो ना इल्ज़ाम नातवानी का
बोझ उठाएं हैं जिंदगानी का।
इरफान अलीराजपुरी,,,
जिस्म को छोड़ के उलझा रहा परछाई में।
हर कदम पर ठोकरें खाई यूं सच्चाई में।
पी.डी.रायपुरिया,,,
आज़ादी के अमर शहीदों का करता है गुणगान
हमारा भारत देश महान हमारा भारत देश महान
दीपक कटकानी दीप,,,
चमकते चांद का टुकड़ा मेरा तिरंगा है
नई खुशियों का सवेरा मेरा तिरंगा है
निसार पठान रम्भापुरी,,,
मनचाही मांगी हुई मुराद मन्नत लगता है
मेरा भारत मुझे खुशनुमा जन्नत लगता है
लता देवल,,,,
छुपछुप कर सब देख रहा था बगैर निमंत्रण आया था।।
स्वतंत्र देश की चाहत में यौवन अपना झुठलाया था।।
कार्यक्रम के अंत में ज़िला समन्वयक सरफ़राज़ भारतीय ने सभी अतिथियों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।













