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सिलसिला” के तहत स्मृति स्मरण रचना पाठ सम्पन्न।

“सिलसिला” के तहत स्मृति स्मरण रचना पाठ सम्पन्न।

मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के जानिब से श्योपुर में हुआ रहमतुल्लाह ग़ौरी एवं काले ख़ां नश्तर की याद में प्रोग्राम।

Hasrat ali

Bhind/ श्योपुर। मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी (संस्कृति परिषद) संस्कृति विभाग के बैनर तले ज़िला अदब गोशा श्योपुर द्वारा “सिलसिला” और “तलाशे जौहर” के तहत रहमतुल्लाह ग़ौरी एवं काले ख़ां नश्तर की याद में स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन 30 जुलाई श्योपुर में किया गया।

अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने जानकारी देते हुए बताया कि दोपहर बाद शुरू हुए प्रोग्राम में श्योपुर ज़िला मध्यप्रदेश का एक ऐसा ज़िला है जिसको साहित्यिक दृष्टि से बहुत समृद्ध नहीं माना जाता है। लेकिन जब उर्दू अकादमी इस ज़िले में पहुंची तो न केवल उल्लेखनीय दिवंगत शायरों और साहित्यकारों के नाम जानकारी में आए बल्कि कुछ नए रचनाकारों की भी सूची अकादमी को प्राप्त हुई है। जिसमे अच्छे रचना कर मिले।

उन्होंने आगे बताया कि यहां श्योपुर के इस कार्यक्रम में वहाँ के प्रसिद्ध शायर काले खां नश्तर और महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सेवी रहमतुल्लाह ग़ौरी को याद किया गया। इस दौरान वक्तों ने उनकी जिंदगी पर प्रकाश डालते हुए उपलब्धियां गिनाई।

वही श्योपुर ज़िले के समन्वयक अनवर ग़ाफ़िल ने बताया कि आज सिलसिला कार्यक्रम की अध्यक्षता श्योपुर के वरिष्ठ समाज सेवी हाजी अय्यूब के ख़ान ने की एवं विशिष्ट अतिथियों के रूप में दौलत राम और मोहम्मद चीनी क़ुरैशी मंच पर आसीन रहे।

प्रोग्राम की शुरुआत श्योपुर के साहित्यकार डॉ अय्यूब गाज़ी ने महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सेवी रहमतुल्लाह ग़ौरी,डॉ अशफ़ाक़ अर्शी ने प्रसिद्ध शायर काले ख़ां नश्तर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर वक्तव्य प्रस्तुत किये। डॉ. अय्यूब ग़ाज़ी ने आगे कहा महान क्रांतिकारी समाज सेवी श्री ग़ौरी को न केवल स्वतंत्रता सेनानी होने का गौरव प्राप्त था बल्कि उन्होंने श्योपुर के विकास के लिए भी बहुत कार्य किये। वो श्योपुर नगरपालिका के अध्यक्ष भी रहे । बे समाज सेवा के कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते रहे।

कार्यक्रम में रचना पाठ के अंतर्गत जिन शोअरा ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, उनमें विशिष्ट आमंत्रित शायर के रूप में शिवपुरी के वरिष्ठ शायर इशरत ग्वालियरी ने उर्दू शायरी के बारे में चर्चा की और अपना कलाम भी प्रस्तुत किया।,,,,

स्थानीय शायरों /साहित्यकारों में बाजुद्दीन बाज़, सईद खां चराग, मौलाना रफ़ीक़, हमीद बालापुरी, डॉ. रफ़ीक़ गिरधरपुरी,अनवर अमरोही,अमर लाल राठौर अमर,सत्यनारायण शर्मा तरूण,इरफ़ान कनापुरी, मांगीलाल मरमिट,तालिब तुफानी (श्योपुर) आदि शामिल हुए।

पेश है कुछ शायरो के चुनिंदा अशआर..
इशरत ग्वालियरी ने कहा
“कह पाओगे तुम इशरत मुश्किल है ग़ज़ल कहना.
जज़्बात के धागे में अल्फाज़ पिरोना है.”

डॉ. अय्यूब ख़ान ग़ाज़ी की अर्चना,,,
“गीता का अंग भी है ये हिस्सा क़ुरान का
दोनों मिले तो दिल बना हिंदोस्तान का”

डॉ. अशफ़ाक अर्शी की रचना वांगी देखिए,,
“सदा अम्न का दीप जला है भारत की तहज़ीब से!
सच कहता हूं मैंने इसको देखा है बहुत क़रीब से! ”

सईद खां चराग़,,,
“बंदूक़ पर यक़ीन न तीरो कमान पर
करता है राज आज भी सारे जहान पर
गांधी वो गांधी जिसका कि हथियार सब्र था
सब कुछ निसार कर गया हिन्दोस्तान पर”

हमीद बालापुरी,,,,
“ख़ुदा या हौसला ऐसा मुझे अता फ़रमा
कि राहे हक़ में मेरे पाऊं डगमगा न सकें।”

श्योपुर जिला समन्वयक अनवर ग़ाफ़िल फरमाया,,
“दिल में बुग़्ज़-ओ-हसद ना जलन चाहिये
मुझको ख़ुशबू से महका चमन चाहिये।”

सत्यनारायण शर्मा (तरूण ) ने रचना पाठ किया,,,
“दुश्मनी के सारे मसअले फिर से हल हो जाएंगे
देख लेना दोस्ती में हम सफल हो जाएंगे”

तालिब तुफ़ानी के बानगी देखिए,,,,
“हमने अपनी ग़ज़लें ख़ारिज कर डाली
सोचो मेरी जान तुम्हारा क्या होगा!”

वही अमर लाल राठौर ने कहा,,,
“बने रहो तुम कितने भी ताजो तख़्त वाले
जिस दिल में मोहब्बत नहीं होती उसे कोई पसन्द नहीं करता।”
वही निर्देशक मेहंदी साहब ने बताया कि कार्यक्रम जमात खाना,पुल दरवाज़ा,श्योपुर में सम्पन्न हुआ । इस पूरे कार्यक्रम को सजाने और संवारने में श्योपुर ज़िला समन्वयक अनवर गाफ़िल का योगदान रहा है।

कार्यक्रम का संचालन अय्यूब ग़ाज़ी द्वारा किया गया।प्रोग्राम के आख़िर में ज़िला समन्वयक अनवर ग़ाफ़िल ने पधारे हुए अतिथियों एवं श्रोताओं का तहे दिल से आभार व्यक्त किया।

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