भिण्ड। सड़क दुर्घटना या अन्य घटनाओं में घायल मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने वाली एफआरबी (फर्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई मामलों में एफआरबी चालक और स्टाफ घायल मरीज को जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर उतारकर बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के तुरंत रवाना हो जाते हैं।
इस वजह से अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों को मरीज की स्थिति, घटना का विवरण और प्राथमिक जानकारी समय पर नहीं मिल पाती। कई बार गंभीर घायल को स्ट्रेचर तक उपलब्ध कराने में भी देरी होती है, जिससे मरीज और उसके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सूत्रों के अनुसार, नियमानुसार एफआरबी को घायल मरीज को सीधे अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर या इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाना चाहिए। इसके बाद अस्पताल के स्टाफ को घटना की पूरी जानकारी देकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के पश्चात ही वाहन को वापस जाना चाहिए। लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं हो रहा है।
जिला अस्पताल के डॉक्टर का कहना है कि मरीज को केवल गेट पर छोड़कर चले जाना उचित नहीं है। संबंधित स्टाफ को मरीज को इमरजेंसी तक पहुंचाकर अस्पताल को आवश्यक जानकारी देनी चाहिए, ताकि तत्काल उपचार शुरू किया जा सके।
एफआरबी की इस कार्यप्रणाली से आम लोगों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि आपातकालीन सेवा का उद्देश्य केवल मरीज को अस्पताल के बाहर छोड़ना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित रूप से इलाज शुरू होने तक अस्पताल के जिम्मेदार स्टाफ को सौंपना है।
अब सवाल यह है कि यदि एफआरबी कर्मी अपनी निर्धारित जिम्मेदारी का पालन नहीं कर रहे हैं तो संबंधित अधिकारियों द्वारा इस पर क्या कार्रवाई की जाएगी। जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों की जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि आपातकालीन सेवा पर लोगों का विश्वास बना रहे।













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