भिंड।
जिले के जामपुरा रेलवे क्रॉसिंग के पास चार दिन पहले मिले युवक के शव के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए मृतक के ही भाई को हत्यारा निकाला है। जमीन के पैसों के विवाद में आरोपी भाई ने अपने साथियों के साथ मिलकर सगे भाई की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिए हैं।
पुलिस के अनुसार 11 मार्च 2026 की शाम जामपुरा रेलवे पटरी के पास करीब 24 वर्षीय युवक का शव मिला था। बाद में उसकी पहचान ग्राम चंदूपुरा निवासी कृष्णकांत पाराशर के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवक की मौत गोली लगने से होना सामने आया, जिसके बाद थाना देहात में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव पाठक और नगर पुलिस अधीक्षक निरंजन सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी देहात निरीक्षक मुकेश शाक्य के नेतृत्व में टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और ग्रामीणों से पूछताछ की।
जांच में सामने आया कि मृतक अविवाहित था और पिता द्वारा बेची गई जमीन के पैसों के बंटवारे को लेकर उसका अपने भाई से विवाद चल रहा था। सीसीटीवी फुटेज में मृतक अपने गांव के एक दोस्त के साथ मोटरसाइकिल से दीनपुरा की ओर जाता हुआ दिखाई दिया। पूछताछ में दोस्त ने बताया कि मृतक को उसका भाई जामपुरा रेलवे क्रॉसिंग पर समझौते के लिए बुलाया था।
वहां पहले से मौजूद आरोपी गोपाल पुत्र रामनरेश पाराशर (17 वर्ष) निवासी चंदूपुरा और उसके साथी अमन उर्फ अरमान पुत्र हजरत खान (19 वर्ष) ने बातचीत के दौरान 315 बोर के कट्टों से फायर कर दिया, जिससे कृष्णकांत पाराशर की मौके पर ही मौत हो गई। गोली चलने से घबराकर मृतक का दोस्त मौके से भाग गया।
पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर जामपुरा–रानी बिरगवां रोड से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उन्होंने हत्या करना स्वीकार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त दो 315 बोर के कट्टे भी बरामद किए गए हैं।
इनकी रही अहम भूमिका
मामले के खुलासे में निरीक्षक मुकेश शाक्य, उपनिरीक्षक प्रमोद तोमर, नागेश शर्मा, अजय यादव, बलराम यादव, सहायक उपनिरीक्षक कासिम खान, प्रधान आरक्षक रवि जादौन, हरवीर गुर्जर, शैलेन्द्र सिंह, मुकेश खंडेलवाल, गुरुदास सोही तथा साइबर सेल के आरक्षक आनंद दीक्षित सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।














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