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वेटलैंड समाप्त होने का गौरी सरोवर एक ज्वलंत उदाहरण है। डॉ मनोज जैन

शेड्स ऑफ़ हैप्पीनेस के सहयोग से सुप्रयास ने छात्र-छात्राओं को विश्व वेटलैंड दिवस पर किया जागरूक

भिंड
2 फरवरी 1971 में ईरान के रामसर शहर में दुनिया भर की आद्रभूमियों के संरक्षण के लिए एक सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में आद्रभूमियों के संरक्षण की जरूर को महसूस किया गया। दुर्भाग्यपूर्ण है कि दुनिया भर से 90% वेटलैंड समाप्त हो चुके हैं। हमारे देखते ही देखते गौरी सरोवर एक विशाल वेटलैंड से एक छोटे से तालाब में सिमट कर रह गया है। गौरी सरोवर का पानी कभी ग्वालियर रोड पर बस स्टैंड के आसपास से लेकर लहार रोड तक भूमि को नम रखता था। धीरे-धीरे गोरी सरोवर का क्षेत्रफल काम होता गया और अब इसके चारों ओर की आद्रभूमि समाप्त हो चुकी है।यह दिवस आर्द्रभूमि के महत्व पर प्रकाश डालता है और दुनिया भर में उनके संरक्षण को प्रोत्साहित करता है।

यह दिवस वैश्विक आर्द्रभूमि संरक्षण और टिकाऊ प्रबंधन के लिए देशों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह दिवस आर्द्रभूमियों को प्रभावित करने वाले आवास हानि, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों से निपटने की आवश्यकता पर जोर देता है।
पर्यावरणीय महत्व पर ध्यान केंद्रित करके, यह समुदायों और सरकारों को आर्द्रभूमि संरक्षण को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करता है। आर्द्रभूमि पृथ्वी के जलवायु को नियंत्रित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह जल शुद्धिकरण और पारिस्थितिकी को संतुलित करती हैं। उक्त उद्गार सुप्रयास के सचिव और पर्यावरणविद डॉ मनोज जैन ने शेड्स ऑफ़ हैप्पीनेस के सहयोग से सुप्रयास द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में वयक्त किए।
कार्यक्रम में प्रोफेसर हरेंद्र शर्मा ने कहा कि वेटलैंड बाढ़ सूखा और तूफान से बचाव के लिए बफर का काम करते हैं। वेटलैंड हमारी प्रकृति के ऐसे पारिस्थितिक तंत्र हैं जो दुनिया भर में आजीविका और अर्थव्यवस्थाओं की बहुत मदद करते हैं। वेटलैंड कार्बन की बड़ी मात्रा को अवशोषित करके जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित रखते हैं। बेटलैंड ऐसी नम भूमि को कहते हैं जहां पानी उथला होता है। यह स्थान बड़ी झीलों तालाबों और समुद्र के किनारे भी हो सकते हैं। इन आद्रभुमियो का अपना एक पारिस्थितिक तंत्र होता है। जिसमें सूक्ष्म शैवालों से लेकर बड़े-बड़े पक्षी पाए जाते हैं यह आर्द्रभूमियाँ सांस्कृतिक, मनोरंजक और सौंदर्य मूल्यों में योगदान करती हैं। पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखने में उनकी भूमिका पर जोर देते हुए आर्द्रभूमि के संरक्षण और टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 2 फरवरी 1971 को रामसर कन्वेंशन हुई थी। तभी से 2 फरवरी को विश्व वेटलैंड दिवस आयोजित किया जाता है। इस वैश्विक मंच के रूप में काम करने और पर्यावरण में आर्द्रभूमि के महत्व और भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 2026 के विश्व आर्द्रभूमि दिवस की थीम “आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव’ है। इसका लक्ष्य यह बताना है कि हमारी विरासत में नदी तालाब और समुद्र के साथ-साथ आद्रभूमियों का कितना अधिक महत्व था और हमारे पारंपरिक ज्ञान में इन सब का बहुत योगदान था। मानव कल्याण के सभी पहलू जैसे – शारीरिक, मानसिक और पर्यावरण आर्द्रभूमि के स्वास्थ्य से परस्पर जुड़े हुए हैं।
यह दिवस आर्द्रभूमि के संरक्षण और बहाली को बढ़ावा देता है, जो जैव विविधता और जलवायु विनियमन के लिए महत्वपूर्ण हैं। आर्द्रभूमि विभिन्न प्रकार की प्रजातियों का घर हैं और जल शुद्धिकरण और बाढ़ नियंत्रण जैसी आवश्यक पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करती है। शिक्षा और वकालत के माध्यम से, विश्व वेटलैंड दिवस लोगों को इन प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और रखरखाव के लिए प्रोत्साहित करता है
उक्त उद्गार प्रोफेसर हरेंद्र शर्मा ने सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा आयोजित विश्व वेटलैंड दिवस के अव
सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा विश्व वेटलैंड दिवस के अवसर पर महाविद्यालय छात्र-छात्राओं को वेटलैंड के पारिस्थितिक तंत्र को समझाने के लिए गौरी सरोवर पर कार्यक्रम को आयोजित किया गया।

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