विश्व पर्यावरण दिवस पर विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कराया अवगत
भिण्ड, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा श्रीराम कंप्यूटर क्लासेस में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय था “अंटार्कटिका से चंबल तक : जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चेतावनी और स्थानीय प्रभाव”। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन के वैश्विक और स्थानीय प्रभावों की जानकारी दी गई।
सुप्रयास के सचिव एवं पर्यावरणविद् डॉ. मनोज जैन ने कहा कि दक्षिणी ध्रुव स्थित अंटार्कटिका में तेजी से पिघल रही बर्फ और कमजोर होती महासागरीय धाराएं पूरी दुनिया की जलवायु व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि अंटार्कटिका पृथ्वी के प्राकृतिक शीतलन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण वहां की बर्फ तेजी से घट रही है। इसका असर वर्षा चक्र, समुद्री पारिस्थितिकी और मानसून आधारित देशों पर पड़ सकता है।
डॉ. जैन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव चंबल अंचल में भी दिखाई देने लगे हैं। क्षेत्र में अनियमित वर्षा, बढ़ता तापमान, सूखा और बाढ़ जैसी स्थितियां जल सुरक्षा एवं जैव विविधता के लिए चुनौती बन रही हैं। उन्होंने चंबल नदी को देश की सबसे स्वच्छ नदियों में से एक बताते हुए कहा कि यहां घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन, इंडियन स्किमर, कछुए और ऊदबिलाव जैसे दुर्लभ जीव पाए जाते हैं, जिनके प्राकृतिक आवास जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो सकते हैं।
कार्यक्रम में मेंढकों की घटती संख्या पर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने बताया कि मेंढक पर्यावरणीय स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक होते हैं और उनकी संख्या में कमी पारिस्थितिक असंतुलन का संकेत है। विद्यार्थियों को जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, पौधारोपण, प्लास्टिक उपयोग में कमी तथा स्थानीय जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। “दस छोटे कदम” अभियान के अंतर्गत दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले पर्यावरणीय उपायों की भी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। डॉ. मनोज जैन ने कहा, “अंटार्कटिका की बर्फ और चंबल की लहरें हमें एक ही संदेश देती हैं—प्रकृति की रक्षा ही मानवता की रक्षा है।” इस अवसर पर डॉ. रवि जैन ने विद्यार्थियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।















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