Hasrat ali
Bhind। नवाज रहा है तो यूं नवाज मुझे कि मेरा जिक्र मेरे बाद बार-बार चले! किसी शायर की यह लाइन उसे एक शिक्षक की दुआ सी लगती है जो ईश्वर से हमेशा अपने लिए यही दुआ मांगता है। कि जब में जाऊ तो लोग मुझे मेरे बाद याद रखें। और हुआ भी यही कि जब गांव में पढ़ाने वाले शिक्षक के तबादले पर शिक्षक से लिपट लिपट कर काफ़ी देर तक विदाई के दौरान छात्र छात्राएं रोते रहे। वहीं गाँव बालो ने भी अपने शिक्षक को नम आंखों से अपने ग्राम से दूर बिदा किया ।
दरअसल मामला भिण्ड जिले की लहार तहसील के ग्राम रूरई का है जहां शासकीय हाई स्कूल के एक शिक्षक के तबादले के बाद छात्र छत्राए अपनी आंखों के आंसू ना रोक सके। इतना ही नहीं गाँव के लोग भी जब शिक्षक को तबादले के बाद गांव से दूर तलक के छोड़ने गए तो फफक पड़े और शिक्षक से लिपट गए। बताया गया है की लहार तहसील के शासकीय हाई स्कूल रूरई गांव मे आप 15 सालों से प्राचार्य के रूप में पदस्थ थे। शिक्षक अरुण त्रिपाठी का प्रमोशन होने के साथ साथ तबादला हो गया। सुनते ही छात्र छात्राओं में शोक की लहर दौड़ गई। लोग नही चाहते थे।लेकिन प्रशानिक प्रक्रिया के तहत प्राचार्य को शासकीय हायर सेकेंड्री स्कूल असबार में जाना ही था। तभी इस प्रक्रिया को स्वीकार करते हुए प्राचार्य अरुण त्रिपाठी की बिदाई कार्यक्रम किया गया। और बिदाई के दौरान वो हुआ जिसकी कल्पना किसी को नही थी। अपने गुरु के प्रति छात्र छात्राओं का स्नेह और छात्र छात्राओं के प्रति गुरु का स्नेह देख कर गाँव के हर ब्यक्ति की आँख उस वक्त छलक पड़ी जब वे प्राचार्य अरुण त्रिपाठी को अपने गांव के स्कूल से दूर तक पैदा करने आए। इस बिदाई को देखकर बुद्धिजीवी मानते हैं कि गुरु शिष्य की परंपरा का येसे ही निर्वाह होना चाहिए। सच्चे स्नेह से शिष्य अगर गुरु से शिक्षा ग्रहण करता है तो यही हालात पैदा होते हैं। ये शिक्षक दिवस के मौके पर बड़ी बात है ।













